आशिकी
- संगीता शर्मा
- Feb 7
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संगीता शर्मा
शाम का समय था। सूरज धीरे-धीरे पहाड़ों के पीछे छिप रहा था, और आसमान नारंगी और गुलाबी रंगों से भर चुका था। रिया अपने घर की बालकनी में खड़ी होकर चाय की चुस्कियों के साथ इस सुंदर नज़ारे का आनंद ले रही थी। उसके मन में हलचल मची थी, क्योंकि आज उसका सामना आर्यन से हुआ था।
रिया और आर्यन की मुलाकात कॉलेज के एक प्रोजेक्ट के दौरान हुई थी। आर्यन एक शांत और गम्भीर स्वभाव का लड़का था, जबकि रिया चंचल और हंसमुख थी। उनकी दुनिया भले ही अलग थी, लेकिन उनकी सोच कहीं न कहीं मिलती थी।
समय बीतता गया और प्रोजेक्ट खत्म हो गया। लेकिन उनके बीच की दोस्ती और गहरी हो गई। आर्यन अक्सर रिया के लिए कविताएँ लिखा करता था, और रिया उसे हँसी-मज़ाक में टाल देती थी। एक दिन, जब आर्यन ने रिया को अपनी भावनाओं का इज़हार किया, तो वह चुप रह गई। वह खुद भी समझ नहीं पा रही थी कि उसके दिल में क्या चल रहा है।
रिया ने थोड़ा समय माँगा और इस बीच वह खुद को अपने काम में व्यस्त रखने लगी। लेकिन हर बार जब वह अकेली होती, आर्यन का मुस्कुराता चेहरा उसकी आँखों के सामने आ जाता। उसे एहसास हुआ कि वह भी आर्यन से प्यार करती है।
एक महीने बाद, रिया ने आर्यन को उसी जगह बुलाया, जहाँ उनकी पहली मुलाकात हुई थी। वह गुलाबी साड़ी में बेहद खूबसूरत लग रही थी। आर्यन उसकी तरफ देखता रह गया। रिया ने उसकी तरफ बढ़ते हुए कहा, "आर्यन, मैंने तुम्हें जवाब देने में समय लिया, लेकिन अब मुझे यकीन है। मैं भी तुमसे प्यार करती हूँ।"
आर्यन की आँखों में खुशी के आँसू थे। उसने धीरे से रिया का हाथ पकड़ा और कहा, "तुमने मेरी दुनिया को पूरा कर दिया।" वह पल उनके लिए एक नई शुरुआत का प्रतीक था।
और इस तरह, उनकी कहानी जो दोस्ती से शुरू हुई थी, सच्चे प्यार में बदल गई।
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