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नई उड़ान

नंदिता सिंह

मेरी शादी हो चुकी थी, और मैं अपने पति के घर में पहली बार कदम रख रही थी। उनके कमरे में बैठी हुई, मैं जैसे किसी का इंतज़ार कर रही थी। कमरे की हर चीज़ को ध्यान से देख रही थी। दीवारों का रंग, पेंटिंग्स, फूलों की सजावट, यहाँ तक कि मेरी तस्वीरें भी, जो मैंने कभी किसी को नहीं दी थीं। सब कुछ मेरी पसंद का था। मैं सोचने लगी कि ये सब आर्यन और उनके परिवार को कैसे पता चला। तभी दरवाज़े की आवाज़ ने मेरा ध्यान भंग किया। आर्यन, मेरे पति, दरवाज़े पर खड़े थे।
उन्होंने कहा, "आराम से रहिए। मैं समझता हूँ कि आप अभी मुझे ठीक से नहीं जानतीं। कोई बात नहीं, अपना समय लीजिए। जब आप तैयार होंगी, तब हम इस रिश्ते को आगे बढ़ाएँगे। आप सहज हैं न? अगर किसी चीज़ की ज़रूरत हो, तो बताइए।" उनकी बातों का मैं सिर हिलाकर जवाब देती रही। जब उन्होंने कहा, "कपड़े बदल लीजिए, लहंगा काफ़ी भारी होगा," तो मैं चुपचाप चेंजिंग रूम की ओर चली गई।
जब बाहर आई, तो देखा कि उन्होंने मेरे लिए बिस्तर लगा दिया था और ख़ुद दीवान पर सोने की तैयारी कर रहे थे। उन्होंने कहा, "आप आराम से सोइए। किसी चीज़ की ज़रूरत हो, तो मुझे बता दीजिए। शुभ रात्रि।" मैं बिस्तर पर लेट गई, लेकिन नींद नहीं आ रही थी। बीते हुए कल की यादें मन में उमड़ने लगीं।
कॉलेज के दिन याद आ गए। मेरा सपना था कि मैं आईएएस बनकर देश की सेवा करूँ। लेकिन पिताजी ने मेरी आगे की पढ़ाई के बजाय मेरी शादी तय कर दी। परिवार के दबाव में, मैं आर्यन से मिलने गई। मन में असहमति थी, लेकिन कुछ कहने का साहस नहीं था।
शादी के बाद, जब मैं नई ज़िंदगी के साथ तालमेल बिठाने की कोशिश कर रही थी, एक दिन आर्यन मुझे कहीं ले गए। मैं हैरान रह गई जब उन्होंने मुझे एक आईएएस कोचिंग सेंटर के सामने खड़ा पाया। बिना कुछ कहे, उन्होंने मेरा दाखिला करवा दिया।
लेकिन वे यहीं नहीं रुके। हर कदम पर उन्होंने मेरा साथ दिया। मैं सोचती थी कि शादी मेरे सपनों को रोक देगी, लेकिन आर्यन ने साबित किया कि सही जीवनसाथी मिल जाए, तो शादी आपके सपनों को नई उड़ान दे सकती है।
आज, मैं समझ चुकी हूँ कि प्यार कहीं भी, कभी भी हो सकता है। शादी के बाद भी हमारा जीवनसाथी हमारा पहला प्यार बन सकता है। और यही मेरी ज़िंदगी की सबसे बड़ी सच्चाई है।

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