प्रेम पदचाप
- डॉ. जहान सिंह ‘जहान’
- Dec 21, 2024
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Updated: Dec 23, 2024
डॉ. जहान सिंह ‘जहान’
सुशीरो जापान का एक सुंदर खुशहाल गांव, जो अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है। भले लोगों की बस्ती। धान की खेती और फलों के बाग, जीवकोपार्जन का मुख्य साधन। आईको एक खूबसूरत भोली भाली लड़की, जिसे सारा गांव प्यार करता था। माता-पिता गरीब किसान खेतों में काम करते थे। स्कूल के बाद आईको उनके काम में हाथ बटाती थी।
एक दिन वो माँ बाप को खेतों पर खाना देने जा रही थी। रास्ते में गांव के एक मनचले लड़के ने उसके साथ जबरदस्ती की। मजबूर आईको रोती गिड़गिड़ाती रही, विनती करती रही पर अपने को बचा न सकी। लौटकर उसने सब बात बताई। गरीब माँ बाप रोते हुए गांव के मुखिया के पास गए। मुखिया ने उन्हें सांत्वना दी। पंचायत ने उस नीच लड़के को गांव से निकाल दिया। धीरे-धीरे उन लोगों का जीवन पुनः सामान्य हो गया। एक दिन गांव का मुखिया अपने खेत देखने निकला। उसने देखा कि आईको अकेली खेत में काम कर रही थी। उसके माँ-बाप दूर जंगल में लकड़ी लेने गए हुए थे। मुखिया भेड़ की खाल में भेड़िया था। उसकी नीयत खराब हो गई। उसने भी लड़की के साथ मुँह काला किया। आइको बेसहारा रोती चिल्लाते घर पहुंची माँ बाप के पैरों तले जमीन खिसक गई। वह गरीब मुखिया का सामना कैसे करेंगे? फिर भी साहस बटोरकर उन्होंने पंचायत बुलायी। मुखिया ने वक्त की नजाकत देखकर उससे विवाह करने की घोषणा कर दी। न्याय हो गया 14 साल की मासूम को 50 साल के बुड्ढे को बांध दिया गया। इतना बेमेल विवाह वो बेजान जिंदगी गुजार रही थी।
वक्त गुजरता गया। द्वितीय विश्व युद्ध प्रारंभ हो गया। जापान तबाह हो गया। लोग इधर उधर भागने लगे। मुखिया मर गया था आइको पर दुखों का जैसे पहाड़ टूट पड़ा हो। अब वो अपना नया जन्म मान कर भाग निकली। विदेश जा रहे एक पानी के जहाज पर बैठ गयी। नहीं मालूम कहाँ जा रही है?
यूरोप के किसी पोर्ट पर जलपोत रुका। लोग उतरकर जाने लगे। वो भी उतर कर चलदी। एक नौजवान अकेली लड़की, भाषा की परेशानी, भूखी प्यासी लाचार गलियों में भटकती हुई एक छोटे से मकान के बाहर टीन सेट में खड़ी हो गयी। पानी बरस रहा था। रात हो गई थी, कहाँ जाये। मजबूर आइको ने दरवाजा खटखटा दिया।
हैनरी ने दरवाजा खोला। परेशान हो गया। विश्व युद्ध का समय, अनजान एक जवान लड़की को वो भी हावभाव से जापानी। वो सोच नहीं पा रहा था, क्या करें? सर्दी से कांप रही थी, रोने की सिसकियां उसे और बेचैन कर रही थी। हैनरी एक अच्छा इंसान था। दयावश उसने आइको को घर के अंदर आने की इजाजत दे दी। कॉफी पिलाई, थर थर काँपती आईको कुछ स्थिर हुई।
हैनरी पुराने कबाड़ का एक स्टोर उसी घर में चलाता था। अकेला रहता था। आइको थोड़ी देर बाद कमरे में पड़ी बेतरतीब चीजों को सलीके से लगाकर रसोई की तरफ चली गई। हैनरी चिंतित था वो क्या करे और उसे गौर से बस देखता जा रहा था। इतनी खूबसूरती, एक साथ गोरा बदन, मांसल पिंडलीयां, पूरा भरा पूरा सीना, कोमल होठ, और सुनहरे बाल। आइको चाय बनाकर ले आयी और इसारों से समझाने की कोशिश करने लगी कि मैं यहाँ आप पर बोझ नहीं बनूँगी। आपके साथ स्टोर में सहायता करूँगी। हैनरी बोझिल मन से उसे गेट पर छोड़ने जा रहा था। बरसात इतनी तेज और रात अंधेरी कहाँ जाएगी? इस विचार ने उसके कदम पीछे खींच लिए। हैनरी ने उसे रात रुकने की इजाजत दे दी। आइको के आंखो में आंसू और धन्यवाद कहते हुए उसके गले लगकर रोने लगी। इतनी देर तक दोनों उसी स्थिति में खड़े रहे। हैनरी की आँखों में आंसू थे। इतने वर्षों बाद किसी ने उसे गले लगाया था। रात आईको सोफे पर लेटी और इतनी थकी थी। फौरन सो गयी। पर हैनरी सारी रात जागता रहा। बस आईको को देखता रहा।
हैनरी ने अपनी पूर्व प्रेमिका के लिए एक कीमती अंगूठी बनवाई थी। विश्व युद्ध के दौरान वह उससे बिछड़ गई थी और वो उसे अंगूठी नहीं दे सका। आज उस अंगूठी को देखकर पुराने दिन एक बार चलचित्र की तरह चलकर गुजर गए। हैनरी वो अंगूठी साफ करके शो केस में सजा रहा था। आइको ने देखा और कहा, ये बहुत सुन्दर है। हेनरी ने कहा, तुम रख लो। आइको बोली ये तो बेशकीमती है, अगर मुझसे खो गई तो मैं कैसे वापस करूँगी? इसे मैं नहीं ले सकती।
हैनरी कुछ देर सोच विचार करता रहा। फिर अचानक उसने शादी के लिए प्रपोज कर दिया। आइको हस्तप्रद खड़ी थी। आँखों से आंसू बह रहे थे। उसका यह दूसरा जन्म जैसा था। शर्माकर उसने कहा, आपकी पत्नी बनना मेरे मेरा सौभाग्य होगा और अंगूठी पहन ली। अगले दिन चर्च में जाकर शादी कर ली।
“प्रेम पदचाप कितने खामोश होते हैं?
दिलों तक चले आते हैं। बिना किसी आहट के।”
विश्व युद्ध समाप्त हो गया। विदेशी नागरिकों को उनके देश भेजा जाने लगा। आईको और हैनरी ने जापान जाने का पासपोर्ट बनवा लिया। इस उम्मीद से कि पत्नी के साथ पति भी जा सकता है। दो दिन बाद जापान का जलपोत जाएगा। दोनों लोग अपना ज़रूरी सामान और हैनरी अपने महंगे आर्ट पीस ज्वैलरी भी साथ ले जाना चाहता था। दोनों बंदरगाह पहुंचे ,पर हैनरी को अधिकारियों ने जाने से मना कर दिया। आइको बहुत गिड़गिड़ाती रही, प्रार्थना करती रही। हैनरी ने हाथ पकड़ लिया और अपना सारा सामान, पैसे अधिकारियों को देने का लालच दिया। पर वो जा ना सका। अंगूठी वाला हाथ हैनरी चूमता रहा। अधिकारी ने खींचकर आईको को अलग कर दिया और दरवाजा बंद कर दिया। जहाज अलविदा। दोनों के कानों में एक ही सायरन गूंजता रहा। किस्मत ने चाहा तो फिर मिलेंगे। एक ऐसा सच्चा प्यार जो कभी मरा नहीं।
आईको जीवन के आखिरी दिनों तक रोज शाम जापान के बंदरगाह पर आती थी। यूरोप से आने वाले लोगों की भीड़ में हैनरी को तलाशती रही। उसके पास एक स्कार्फ था। जो हैनरी ने उसे पहली रात में दिया था। बस एक निशानी याद की। जिसने उसे बिछड़ कर भी बिछड़ने नहीं दिया। हैनरी इधर, उसका रूमाल, जो पासपोर्ट पर हाथ छुड़ाने में उसके उसके पास आ गया था। उसे लेकर हर रोज़ जापान से आने वाले जहाज के यात्रियों में आईको को ढूंढता रहा।
“प्रेम के इम्तिहान कई होते हैं।
पर प्रेम कभी मरता नहीं।।
बिना इंतजार के प्रेम का क्या कोई किस्सा है।।”
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