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बेपनाह मुहब्बत

शिव सागर मौर्य


धूल मैं तेरी गलियों की,
कदमों से तेरे लिपट जाऊं।
छूटे ना साथ कभी तेरा,
मैं तेरे लिए ही मिट जाऊं।।
हर पल राह निहार रही,
आने की आहट सुन करके।
सब कुछ तो अर्पण कर दूँ,
प्यार को तेरे गुन करके।।
वर्षो बीत चुके अब तक,
केवल इंतजार करते करते।
कितनी बार मैं छली गयी,
बस नाम तेरा रटते रटते।।
दिन बदले मौसम भी बदला,
कभी न बदली तेरी यादें।
गलियों में रह कर हमने,
बिता दिया कितनी रातें।।
एक नजर इधर भी देखो,
तुझपर ही मर मिट जाऊं।
धूल मैं तेरी गलियों की,
कदमों से तेरे लिपट जाऊं।।

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